प्रणय

जीवन की साँझ पर खड़ी अनन्या, जुलाई महीने की ज़ोरदार बारिश को निहार रही थी , ये बारिश भी कितनी रोमांचक है , खुद तो आकर बूंदे बरसाती ही है, उसके साथ साथ उन बूंदों की आवाज़ से बहुतायत स्मृतियों को दस्तक दे जाती है , इन्ही स्मृतियों के एक पिटारे से अनन्या को एक […]

जिंदगी

आज सुबह खिड़की पर चाय का प्याला लिए बैठी थी पीछे मुड़कर देखा तो वह खड़ी थी पता है कौन? जिंदगी मैंने पूछा -कैसे आना हुआ? वह बोली- तुम तो याद करती नहीं सोचा मैं ही आ जाऊं मैंने कहा -अभी बहुत काम में हूं ,बाद में आना मेरी यह बात सुनकर वह धीरे से […]

ज़िद है

अब फिर से खुदको तलाशने की ज़िद है देखा मिलो तक,पर दिखती नहीं कोई हद है इन ठंडी बयारों में गर्माहट की ज़द है तुम्हारी पुकार में आवाज़ मद्धम एहसास बेहद है अपने आकाश को फिरसे रंगने की ज़िद है इस इंद्रधनुष के रंग छोड़ के नया रंग बनाने की ज़िद है ज़िन्दगी को संभालने […]

करवा चौथ

सुमि तीन दिन से बाजार के चक्कर काट रही थी। साड़ी ,बिंदी,मैचिंग झुमके क्या नहीं ख़रीदा उसने ? उसकी बेटी अदिति उसको देख- देख के हैरान हुयी जा रही थी, मम्मी को अचानक ये क्या हुआ- आज सुबह- सुबह उठके पूजा कर रही है। मम्मी तो कभी मंदिर तक नहीं जाती। उसका कोमल मन अपने […]